हाईकोर्ट ने ED की कार्रवाई पर दखल से किया इनकार, याचिका खारिज
इंदौर। सुप्रीम टेक्सटाइल कंपनी एस. कुमार्स नेशनवाइड लिमिटेड (SKNL) के पूर्व चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर नितिन शंभू कुमार कसलीवाल को मनी लॉन्ड्रिंग केस में इंदौर हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई सर्च, सीजर और अटैचमेंट कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए रिट याचिका खारिज कर दी।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता नितिन शंभू कुमार कसलीवाल, SKNL के पूर्व CMD रह चुके हैं। कंपनी ने वर्ष 2010 के आसपास कारोबार विस्तार के लिए विभिन्न बैंकों से भारी कर्ज लिया था, लेकिन बाद में वित्तीय संकट के चलते कर्ज चुकाने में असफल रही। इसके बाद बैंकों ने कंपनी को NPA घोषित किया, और वर्ष 2018 में IBC के तहत कंपनी लिक्विडेशन में चली गई। इसके बाद IDBI बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने RBI की गाइडलाइंस के तहत कंपनी के लोन अकाउंट को “फ्रॉड” घोषित कर दिया, जिससे प्रमोटर्स और डायरेक्टर्स पर 5 साल तक बैंकिंग प्रतिबंध लग गया।
ED की एंट्री और PMLA कार्रवाई
मामले में आगे चलकर ED ने PMLA, 2002 के तहत कार्रवाई शुरू की। 23 दिसंबर 2025 को सर्च और सीजर, 30 दिसंबर 2025 को लंदन स्थित संपत्ति की प्रोविजनल अटैचमेंट की कार्रवाई की गई। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि यह सारी कार्रवाई बिना सुनवाई का मौका दिए की गई और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन, डिप्टी सॉलिसिटर जनरल रोमेश दवे और ED की ओर से अधिवक्ता शान अली खान हाजिर हुए। उन्होंने इस याचिका को premature बताया। दलील दी गई कि “Reasons to Believe” रिकॉर्ड पर हैं और PMLA के तहत एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी के सामने मामला लंबित है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता को वहां पूरा अवसर मिलेगा।
हाईकोर्ट का सख्त रुख
अपने फैसले में डिवीजन बेंच ने कहा कि PMLA के तहत याचिकाकर्ता कसलीवाल के पास स्टैच्यूटरी रेमेडी उपलब्ध है। सर्च, सीजर और अटैचमेंट की वैधता एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी तय करेगी। मनी लॉन्ड्रिंग अपराध शेड्यूल्ड ऑफेंस से अलग है। याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए दुर्भावना (mala fide) के आरोप बिना ठोस आधार के हैं। कोर्ट ने Vijay Madanlal Choudhary केस का हवाला देते हुए ED की कार्रवाई को कानूनसम्मत बताते हुए रिट याचिका खारिज कर दी।
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